Shri Shridhara Tirtha Panchakam

by Dr. L.S.Bhave

(Many thanks to Mrs Sonali Upendra Dasare of Pune for sharing the doc file of this stotra)

।। श्री श्रीधरतीर्थ पंचकम् ।।

सर्वंरोगहरं शुद्धं जलं स्फटिक निर्मलम् ।।
वरदहळ्ळीगिरि संभूतं श्रीधरेति सुचिभूतम् ।।१।।

तीर्थं पापहरं दिव्यं पवित्रं मधुरं शुभम् ।।
तपः स्वाध्यायनिरतै: मुनिभिश्च सुसेवितम् ।।२।।

नात्युष्णम् नातिशीतं च सुखमुत्साहवर्धनम् ।।
दिव्याश्रमस्य सविधे श्रीधरेण सुपालितम् ।।३।।

प्रपातघोषं सुखदं चिरशांतिप्रदायकम् ।।
दिव्यमानंदं स्नानात् दुष्टवृत्तिविनाशकम् ।।४।।

सायुज्यमुक्तिवरदं स्थिरवृत्तिकरं महत् ।।
श्रीधरस्मरणस्नानात् पातु संसारयात्रिकान् ।।५।।