योगिराज श्री श्रीधर स्वामी

वृतांत उद्बोधन – पू. श्री नीलकंठ रामदासी
मूल मराठी लेखन – ज्योतिर्विद जयंत सालगावकर
हिन्दी अनुवाद – डॉ. दत्ता क्षीरसागर